दर्शन कीजिए अति प्राचीन गणेश जी के

विदिशा में गणेशोत्सव उत्साह और भक्तिभाव से शुरू हो गया है । आज दोपहर ठीक 12 बजे गणेश मंदिरों में जन्म आरती हुई और फिर शुरू हो गया आस्था का उत्सव। धर्म, संस्कृति और इतिहास के लिए मशहूर विदिशा शहर में गणेश प्रतिमाएं भी सदियों पुरानी मिलती हैं। इन्हीं में से एक डंडापुरा स्थित चिंतामणि गणेश की प्रतिमा भी सदियों पुरानी है। करीब 90-100 वर्ष पूर्व इस मंदिर का जीर्णोद्धार करते समय प्रतिमा का मुख सड़क की ओर करने का प्रयास किया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिली और करीब 3-4 फीट गहराईमें खोदने के बाद भी उस चट्टान का छोर नहीं मिला जिस पर यह प्रतिमा स्थापित है। इससे अंदाज लगाया जाता हैकि यह प्रतिमा स्थापित नहीं की गई, बल्कि यहीं पर एक चट्टान पर उकेरी गई है। देश विदेश के श्रद्धालुओं में इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है । ...

विदिशा में गणेशोत्सव उत्साह और भक्तिभाव से शुरू हो गया है । आज दोपहर ठीक 12 बजे गणेश मंदिरों में जन्म आरती हुई और फिर शुरू हो गया आस्था का उत्सव। धर्म, संस्कृति और इतिहास के लिए मशहूर विदिशा शहर में गणेश प्रतिमाएं भी सदियों पुरानी मिलती हैं। इन्हीं में से एक डंडापुरा स्थित चिंतामणि गणेश की प्रतिमा भी सदियों पुरानी है। करीब 90-100 वर्ष पूर्व इस मंदिर का जीर्णोद्धार करते समय प्रतिमा का मुख सड़क की ओर करने का प्रयास किया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिली और करीब 3-4 फीट गहराईमें खोदने के बाद भी उस चट्टान का छोर नहीं मिला जिस पर यह प्रतिमा स्थापित है। इससे अंदाज लगाया जाता हैकि यह प्रतिमा स्थापित नहीं की गई, बल्कि यहीं पर एक चट्टान पर उकेरी गई है। देश विदेश के श्रद्धालुओं में इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है ।

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