विदिशा में हुआ दंगल, देखने उमड़ी भीड़
प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी , मकर संक्रांति के अवसर पर विदिशा में , प्रदेश स्तरीय कुश्ती ...
Jan 15, 2023 - 15:51
Updated: Jan 15, 2023 - 15:54
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प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी , मकर संक्रांति के अवसर पर विदिशा में , प्रदेश स्तरीय कुश्ती
दंगल का आयोजन किया गया । जिसमे 50 से ज्यादा पहलवानों ने , कुश्ती में अपने दाव पेंच दिखाएं ।
विदिशा में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी , छाल दिवाली अखाड़ा द्वारा , प्रदेश स्तरीय कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया । जिसमे विदिशा ही नही, आसपास के जिलो के पहलबानो ने हिस्सा लिया , और अपना दम दिखाते हुए दांव पेच दिखाए। कुश्ती के इस पुरानी एवं पारंपरिक खेल को देखने के लिए , दूर-दराज गांवों से ग्रामीण भी पहुंचे , और पहलवानों का उत्साहवर्धन किया । अखाड़े के उस्ताद खेमचंद जी ने बताया कि , पिछले कई वर्षो से अनवरत रूप से अखाड़े द्वारा आयोजन कराया जा रहा है । लगभग ढाई सौ सालों से यह आयोजन होता आ रहा है । भारत की पुरानी परंपरा और देसी कुश्ती का आयोजन होता है । विदिशा जिले से , और प्रदेश के विभिन्न जगहों से , बड़ी संख्या में पहलवान दंगल में भाग लेते हैं । कुश्ती में कला विलुप्त होती जा रही है, मगर इस तरह के आयोजन से क्षेत्र के पहलवानों को प्रेरणा मिलती है। इससे युवा वर्ग पहलवानी की ओर आकर्षित होते हैं। उन्होंने कहा कि कुश्ती से लोग स्वस्थ भी रहते हैं। उन्होंने शासन प्रशासन से पुरानी परंपरा को सुरक्षित रखने के लिए सहयोग की अपील भी की ।
दंगल का आयोजन किया गया । जिसमे 50 से ज्यादा पहलवानों ने , कुश्ती में अपने दाव पेंच दिखाएं ।
विदिशा में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी , छाल दिवाली अखाड़ा द्वारा , प्रदेश स्तरीय कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया । जिसमे विदिशा ही नही, आसपास के जिलो के पहलबानो ने हिस्सा लिया , और अपना दम दिखाते हुए दांव पेच दिखाए। कुश्ती के इस पुरानी एवं पारंपरिक खेल को देखने के लिए , दूर-दराज गांवों से ग्रामीण भी पहुंचे , और पहलवानों का उत्साहवर्धन किया । अखाड़े के उस्ताद खेमचंद जी ने बताया कि , पिछले कई वर्षो से अनवरत रूप से अखाड़े द्वारा आयोजन कराया जा रहा है । लगभग ढाई सौ सालों से यह आयोजन होता आ रहा है । भारत की पुरानी परंपरा और देसी कुश्ती का आयोजन होता है । विदिशा जिले से , और प्रदेश के विभिन्न जगहों से , बड़ी संख्या में पहलवान दंगल में भाग लेते हैं । कुश्ती में कला विलुप्त होती जा रही है, मगर इस तरह के आयोजन से क्षेत्र के पहलवानों को प्रेरणा मिलती है। इससे युवा वर्ग पहलवानी की ओर आकर्षित होते हैं। उन्होंने कहा कि कुश्ती से लोग स्वस्थ भी रहते हैं। उन्होंने शासन प्रशासन से पुरानी परंपरा को सुरक्षित रखने के लिए सहयोग की अपील भी की ।
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